Saturday, November 2, 2013

लघुकथा - चंदा


मीना आंटी जो मकान मालिक हें और उपर के मकान में रहती हें , उन्होने नीचे का कमरा किराए से दे रखा हे, अभी किरायेदार की पत्नी नीलम के साथ बातें करने मे व्यस्त हें ।

दरवाजे पर दस्तक हुई । नीलम ने दरवाजा खोला ।

"
आंटी चंदा दीजिए " एक साथ आए करीब पंद्रह लड़कों मे से एक ने कहा ।

नीलम ने उन्हे 21 रुपये दिए ।

"उपर कहाँ जा रहे हो ?" मीना आंटी की चिल्लाने की आवाज़ उन लड़कों के कानों मे गूँज गई ।

"चंदा लेने" एक लड़के की तरफ से जवाब मिला ।

"अरे दोनो घर एक ही हें , उपर का चंदा भी इसीमें आ गया है । "

और फिर दरवाजा बंद हो गया ।

........

- विकास सोनी

रायपुर , छत्तीसगढ़

3 comments:

  1. वाह...बहुत सुन्दर....बहुत बहुत बधाई...
    नयी पोस्ट@जब भी जली है बहू जली है

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद चतुर्वेदी जी

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